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Fatehpur : फतेहपुर के जोनिहां में गरीबी के चलते एक माँ ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. दिव्यांग महिला की आत्महत्या सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. बड़े बेटे का इलाज कराने में असमर्थ 40 वर्षीय दिव्यांग गायत्री देवी (Gayatri Devi) ने घर की कोठरी में रस्सी के फंदे से लटककर सोमवार को खुदकुशी कर ली.

यह है पूरा मामला

बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के घेरवा निवासी गायत्री देवी के पति रज्जू यादव की छह वर्ष पूर्व बीमारी के चलते मौत हो गई थी. महिला मजदूरी कर 13 वर्षीय पुत्र रोहित यादव7 वर्षीय पुत्र मोहित यादव का पेट पाल रही थी. डेढ़ माह पहले बड़े बेटे का दुर्घटना में पैर टूट गया था. जिसके बाद डाक्टर ने आपरेशन की सलाह दी थी. आपरेशन में आने वाला खर्च उठा पाना महिला के बस के बाहर था. लेकिन किसी से भी उसने रुपये उधार नहीं मांगे. इसी आत्मग्लानि में सोमवार सुबह उसने जान दे दी.

गांव के ही कमलेश कुमारधर्मराज यादव ने बताया कि, कोटे के राशन व मजदूरी से महिला किसी तरह बच्चे पाल रही थी. बेटे के इलाज के लिए रुपये न होने के कारण वह काफी परेशान भी रहती थी. महिला की मौत के बाद दोनों बच्चे अनाथ हो गए हैं. बताते है कि, महिला के नाम 15 बिस्वा खेती है.

सरकारी व्यवस्था पर उठा सवाल, नहीं बना था आयुष्मान कार्ड

पति के मौत के बाद अकेली पड़ी महिला का आयुष्मान कार्ड तक नहीं बना था. कार्ड बना होता तो बच्चे का इलाज न करा पाने की आत्मग्लानि मे वो जान न देती. महिला को विधवा पेंशन भी नहीं मिल रही थी और न ही अंत्योदय कार्ड बना हुआ था. प्रधान सोनी शुक्ला (Soni Shukla) ने कहा कि, आयुष्मान की सूची में महिला का नाम नहीं था, पात्र गृहस्थी कार्ड से राशन दिया जाता था.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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