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अपने कभी सोचा है की बस एक यात्री के लिए पूरी ट्रेन चला दी जाए. जी हाँ ऐसा भी संभव है. मामला नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस से जुड़ा है. ये ट्रेन दिल्ली से रांची के लिए रवाना तो हुई लेकिन बीच रास्ते में ही अटक गयी.

दरअसल, डाल्टनगंज में आंदोलन के कारण ट्रेन को रोकना पड़ा था, जिसके बाद ट्रेन में सवार 930 यात्रियों को बस के माध्यम से रांची तक भेजा गया। लेकिन ट्रेन में बैठी युवती ने बस से जाने से इनकार कर दिया। दरअसल अनन्या का कहना था की जब ट्रेन का टिकट लिया है तो आखिर बस से क्यों जाएं? हालांकि 930 यात्रियों में से 929 यात्री बस से अपनी मंजिल के लिए रवाना हो गए लेकिन अनन्या वहीं अड़ी रही.

अनन्या को रेलवे अधिकारियों ने कैब से जाने का भी ऑफर दिया जो उन्होंने ठुकरा दिया। राँची के धुर्वा इलाक़े की निवासी अनन्या बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में क़ानून की छात्रा हैं. उनके पिताजी हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में काम करते हैं. छोटी उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया.

इन सबके बीच कुछ लोगों का ये भी कहना है कि अनन्या ने अपने इस कदम से रेलवे का नुकसान कराया है। हकीकत में ऐसा नहीं है। ट्रेन को हर हाल में रांची रेलवे स्टेशन आना ही था। राँची रेल मंडल के वरिष्ठ डीसीएम अवनीश कुमार ने मीडिया से कहा, “राजधानी एक्सप्रेस को तो राँची आना ही था क्योंकि इधर से उसकी वापसी निर्धारित थी. इसके लिए लोगों ने टिकट ले रखे थे. रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के मद्देनज़र उनके लिए डाल्टनगंज में बसों की व्यवस्था की थी क्योंकि डायवर्डेट रूट से राँची आने में अतिरिक्त समय लगता.”

अवनीश कुमार ने कहा कि ‘अनन्या चौधरी बस से जाने के लिए तैयार नहीं थीं, इसलिए वो ट्रेन से ही आईं. हम नहीं मानते कि इसमें एक पैसेंजर के लिए ट्रेन चलाने जैसी कोई बात है.’

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