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Just Think: हम बहुत पीछे नहीं जाएंगे. बीते कुछ महीनों की हेडलाइन्स पर ही नज़र डालिए:

  • शर्मनाक! कोविड+ महिला को अस्पताल ले जाते वक्त रेप, एंबुलेंस का ड्राइवर ही है आरोपी
  • लखीमपुर खीरी: 3 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या, रितेश देशमुख ने लिखा, ‘सिर शर्म से झुक गया’
  • यूपी के मथुरा में निर्भया जैसी वारदात, चलती डबल डेकर बस में महिला से रेप, 40 यात्री थे सवार
  • स्कॉलरशिप फॉर्म भरने निकली थी 17 साल की दलित लड़की, रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई
  • किस हद तक गिर चुका है समाज! राजस्थान में एक मूक-बधिर बच्ची के साथ गैंग रेप

इस देश में महिलाएं तो क्या, नन्हीं बच्चियां भी सुरक्षित नहीं है. हर वर्ग, समुदाय, उम्र, शारीरिक हालातों वाली महिलाएं इस घिनौनी हरकत का शिकार है. मगर कुछ दिनों की चिल्लम-चिल्ली, अखबारों और सोशल मीडिया में कवरेज मिल जाने के बाद क्या होता है? सब भूल जाते हैं.

क्या हमारे दो से सात दिन के सोशल मीडिया या ज़मीनी गुस्से से कुछ हो पाता है? सवाल हमें खुद से पूछना है. ऐसे मामलों को भी हम महज़ सोशल मीडिया ट्रेंड की तरह बड़ी जल्दी भूल जाते हैं. 

ऐसे कई केसेस को हम कितना याद रखते हैं. अपने मुक़दमे के लिए जा रही उन्नाव रेप सर्वाइवर को रास्ते में आग लगाने वाला आरोपी खुला घूमता पाया गया था. जब सवाल उठे तो पुलिस ने कहा कि उसे जमानत मिल गयी थी, जबकि एक अन्य आरोपी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था.  बेहद शर्म की बात तो तब भी थी जब उन्नाव रेप का दोषी मंत्री कुलदीप सेंगर जेल चला जाता है, लेकिन एक हिंदी अखबार के स्थानीय संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ स्वतंत्रता दिवस के बधाई विज्ञापनों पर देखा गया. हालांकि, भाजपा ने सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर दिया था.

बीते कुछ समय पहले की ही रेप केसेस को देखते हैं और यहां हमें खुद से पूछना है कि हमने इन घटनाओं के बारे में कितनी जानकारी थी और हमने इन पर कैसे रियेक्ट किया और फिर सत्ता में बैठे लोगों ने भी इसपर मिट्टी डाल दी.

कोरोना वॉर्ड में रेप का मामला

एक गर्भवती महिला अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कोरोना वॉर्ड में भर्ती थी. परिवार ने हेल्थ वर्कर पर रेप का आरोप लगाया. परिवार ने कहा कि महिला के साथ लगातार 2 दिन तक रेप किया और घर पहुंचने पर उसे ब्लीडिंग हुई, जिससे उसकी मौत हो गयी. परिवार ने वर्कर के खिलाफ FIR दर्ज करवाई.

जिसका रेप, उसी को सज़ा

अररिया में एक 22 साल की गैंगरेप विक्टिम को कोर्ट ने ‘बुरे बर्ताव’ के लिए सज़ा दी. इस लड़की को कोर्ट ने सज़ा सुना कर जेल भी भेज दिया गया. कहा गया कि इस लड़की ने कथित रूप से अपने बयान रिकॉर्ड करने से पहले उसे एक सोशल वर्कर के द्वारा चेक कराये जाने की मांग की थी और इस दौरान उसने “अपनी आवाज़ ऊंची” की थी.

लड़की से पुलिस ने बार-बार उसके साथ गैंगरेप की घटना का ज़िक्र करने को कहा, जिसके बाद वो चिढ़ गई. उसे न केवल विक्टिम ब्लेम किया गया, बल्कि उसे कोर्टरूम में जबरन चार घंटे तक बैठाया गया. अब इन तीनों पर IPC की धारा 353 के तहत लोक सेवक के काम में बाधा डालने, धारा 180 के तहत अपने बयान पर साइन न करने जैसे कुछ और चार्ज भी लगा दिए गए.

मूक-बधिर बच्ची से दरिंदगी

राजस्थान के दौसा में कथित रूप से 5 लोगों ने एक मूक-बधिर किशोरी के साथ गैंग रेप किया. बच्ची मूक-बधिर होने की वजह से अपनी हालत परिवार को नहीं बता पा रही थी. जिसके चलते पुलिस को इसकी जानकारी तीन चार दिन बीत जाने के बाद कहीं से पता लगी. पुलिस ने जांच की और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया. दौसा एसपी मनीष अग्रवाल ने बताया कि मामले में सर्वाइवर ना तो बोल कर और ना ही लिख कर बयान दे पा रही थी, जिसके चलते ऐसे में इंटरप्रेटर के माध्यम से पीड़िता के बयान दर्ज हुआ.

13 साल की बच्ची से रेप

इसी साल 15 अगस्त को 13 साल की बच्ची को रेप के बाद बेहद वीभत्स तरह से मारा गया है. उसकी आंखें निकाल ली गई. जीभ काट दी गई. पुलिस के हवाले से बच्ची के रेप और गाला घोंट कर मौत की पुष्टि की गई. जबकि आंखें निकलने और जीभ काटने की बात को लखीमपुर खीरी के एसपी सत्येंद्र कुमार ने नकार दिया है. उनके अनुसार, “उसकी जीभ नहीं काटी गई, न ही आंखें निकाली गई हैं. ऑटोप्सी रिपोर्ट में बलात्कार और गाला घोंटने की बात कही गई है. बॉडी की आंख के आस-पास छिलने के निशां थे, जो शायद गन्ने के पत्तों की वजह से लगे हों. उसकी लाश गन्ने के खेत में मिली थी.” 

लड़की के माता-पिता के हवाले से कहा गया है कि वह छात्रवृत्ति फॉर्म भरने के लिए दूसरे शहर के लिए सोमवार को घर से निकली थी. जब वह नहीं लौटी, तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया. 

90 साल की महिला से बलात्कार

दिल्ली में एक 90 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार और बेरहमी से पीटा गया. वह अपने घर के बाहर अपने दूधवाले का इंतजार कर रही थी. उस समय एक अजनबी आया और कहा कि वह उसे दूधवाले के पास ले जाएगा. वह शख्स उसे रेवला खानपुर फार्म में ले गया, जहां उसने उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया. जब महिला ने आरोपी का विरोध किया, तो उसने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की. ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस को बुलाया. पुलिस ने महिला के बेटे को बुलाया और उन्हें अस्पताल ले गई. महिला की Medicolegal (MLC) रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर और निजी अंगों पर कई चोटें आई. आरोपी की पहचान सोनू के रूप में हुई है. वह दिल्ली के रेवला खानपुर गांव का रहने वाला है. उसके खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

इस लिस्ट में ढेरों मामले शामिल है. कई मीडिया में आये, कई थाणे तक पहुंचे तो कई घर की चारदीवारी में ही कैद होकर रह गए. मामले जो प्रकाश में आये उनका भी क्या हुआ. क्या हमने किसी ज़िम्मेदारी के साथ उनकी आगे की कार्रवाई के लिए किसी भी तरीके से सवाल उठाये या फिर ज़रूरी समझा. 

वर्तमान में, हाथरस गैंगरेप को लेकर आक्रोश होना पॉजिटिव समाज होने की झलक है. मगर सवाल हम पर भी लाज़मी है क्योंकि यह ब देखने के बाद हम भूल जाते हैं.

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