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Fatehpur: घटना ललौली के तपनी गाँव की है, जहाँ पर 20 किलो गोमांस के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. बताया जा रहा है, की इनके पास से छुरी, नायलॉन की रस्सी, तराज़ू आदि बरामद किये गए है, जिसके बाद इन पर गोवध निवारण आधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. गाँव के लोगो ने पुलिस को सूचना देते हुये बताया, कि गाँव के अंदर कुछ लोगो ने मिलकर एक गाय की हत्या कर दी है. जानकारी मिलने पर ललौली थाने के उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह(Santosh Kumar Singh) ने तपनी गाँव में छापेमारी कर फूलचंद्र पासी, अशोक व आसिब को गोमांस के साथ पकड़ लिया. गाँव के निवासियों ने पुलिस को इस बात की भी जानकारी दी है,कि इसी तरह ललौली क़स्बा, जजरहा में भी गायों को काटा जा रहा है.

एसओ(S.O.) योगेंद्र पटेल(Yogendra Patel) ने बताया कि तीनों आरोपियों को कोर्ट भेजा गया है, और बरामद हुए गोमांस की मेडिकल जाँच करवाने के बाद उसको ज़मीन के नीचे दफनाने की बात कही है.

क्या कहता है, भारत का संविधान

हमारे भारत के संविधान के अनुच्छेद 48 में गायों और बछड़ो की हत्या पर रोक लगाने की बात कही गयी है. गोवध निवारण अधिनियम 6 जनवरी, 1956 को विभिन्न राज्यो में लागू हुआ था. इस कानून में अब तक चार बार बदलाव किये गए है. भारत के 29 राज्यों में गोहत्या या गोमांस बेंचने पर अलग-अलग नियम है.भारत के 29 राज्यों में से 11 ऐसे भी राज्य शामिल है, जहाँ पर गाय बछड़ा, बैल सांड और भैंस को काटने व खाने पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं है.

इन राज्यों पर नहीं है, प्रतिबन्ध

दस राज्यों- केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणांचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड,त्रिपुरा, सिक्किमऔर एक केंद्र शासित लक्ष्यद्धीप में गोहत्या पर कोई रोक नहीं है. यहाँ खुले तौर पर बाजार में हर तरह का मांस बिकता है.

गोहत्या करने व करवाने पर होगी सज़ा

उत्तर प्रदेश सरकार ने गोहत्या निरोधक कानून को कड़ा कर दिया है. गोहत्या के दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 5 लाख तक का जुर्माना भरना होगा, इसके साथ ही गाय को चोट पहुँचाने या उसकी जान को खतरे में डालने वाला कोई भी काम करना सज़ा की वजह बन सकता है, और इसके लिए भी 7 साल तक की सजा देने का नियम बनाया गया है.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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