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Varanasi: क्रायोथेरेपी (शीत चिकित्सा पद्धति) से त्वचा कैंसर के उपचार में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), को बड़ी सफलता मिली है. मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अमितेश कुमार(Amitesh Kumar) के निर्देशन में प्रशांत श्रीवास्तव(Prashant Srivastva) व सर्वेश कुमार (Sarvesh Kumar)ने मल्टीहोल नोज़ल बनाया है, जिससे ट्यूमर पर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले तरल नाइट्रोजन का स्प्रे करने से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करने में न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि यह विधि ज्यादा प्रभावीं भी साबित होगी. इस तकनीक को पेटेंट के लिए भेजा गया है, डा. प्रशांत ने बताया कि हमारे शरीर में किसी भी अंग की कोशिकाए माइनस 40 डिग्री तापमान में आते ही नष्ट हो जाती है. अभी कैंसर कैंसर के इलाज में सिंगल होल (छिद्र ) वाले नोज़ल का इस्तेमाल किआ जाता है. इससे कम मात्रा में तरल नाइट्रोजन ट्यूमर तक पहुँच पाने के कारण यह 15 मिमी व्यास तक के ट्यूमर पर ही प्रभावी है. वही, मल्टीहोल नोज़ल में कई छेद होने से 25 मिमी व्यास तक के ट्यूमर को नष्ट किया जा सकेगा.

तरल नाइट्रोजन की खूबियां

तरल नाइट्रोजन विषैली नहीं होती है. यह त्वचा की सतह के तापमान को इतना कम कर देती है कि कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद मिलती है. क्रायोथेरेपी में इलाज के लिए स्वीकार्य तापमान माइनस 20 डिग्री से माइनस 40 डिग्री है.

इसलिए ट्यूमर बनती है कोशिकाएं

हमारे शरीर में कोशिकाएं अपने आप जन्म लेती है और तय समय में खुद ही ख़त्म भी हो जाती है. यह प्रक्रिया सही ढंग से चलती रहे तो सब ठीक रहता है. यदि किसी कारण कोशिकाएं मरना बंद कर दे तो वह तेज़ी से बढ़ने लगती है और ट्यूमर में बदल जाती है.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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