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Fatehpur: सहभागिता योजना से गाय लेकर बेसहारा छोड़ने वाले पशुपालकों की अब खैर नहीं है. प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कराई है, शुरुआती जांच में गाय ले जाने वालों के खूंटे में अब गाय नहीं मिल रही है. जांच अभी चल रही है, लेकिन प्रशासन ने अपना रुख साफ कर दिया है. गाय लेकर गायब करने वाले पशुपालकों पर मुकदमा भी दर्ज होगा और जो रकम उन्होंने सरकार से लाभ के रूप में ली है उसकी ब्याज सहित वसूली भी की जाएगी.

जिले में 922 पशु पालकों को गाय सहभागिता योजना से निःशुल्क दी गई हैं. इन पशुपालकों को गायों के चारा-दाना के लिए हर माह प्रति पशु के हिसाब से 900 रुपये का अनुदान भी दिया जा रहा है. सहभागिता योजना में किए जा रहे हेर- फेर से पर्दा हटाया तो हकीकत खुलकर सामने आ गई. सीडीओ(C.D.O.) ने जिला कृषि विभाग और पशुपालन विभाग से सहभागिता योजना में दी गई गायों की जांच शुरू कराई है, जांच में अब यह खुलकर आया है कि गाय तो ली गई हैं, लेकिन अब किसानों के पास गाय नहीं हैं. हालांकि जांच अफसरों ने अभी जांच रिपोर्ट प्रशासन को नहीं सौंपी है. बावजूद इसके प्रशासन ने गाय के नाम पर खेल करने वाले पशुपालकों व सांठ-गांठ करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का शिकंजा कस दिया है.

पहला केस –

साहब गाय भाग गई, खोजा पर मिली नहीं

ताजा मामला अयाह गोशाला का है. दरअसल इस गोशाला से गाय लेने और सहभागिता योजना का अनुदान लेने वाली जब दो महिला पशु पालकों के घर जांच अफसर पहुंचे तो उन्हें गाय नहीं मिली. पूछा तो दोनों महिलाओं ने कहा कि साहब गाय अभी तक थी, हाल ही में खूंटा तोड़कर भाग गई है. हालांकि जांच अफसरों द्वारा विभाग व पुलिस को सूचना न देने के सवालों पर महिलाओं के पास कोई जवाब नहीं था.

दूसरा केस –

बहुआ में पशुपालक बोले-गाय मर गई

गांव गांव पहुंच रहे जांच अधिकारियों के सामने तरह तरह के झूठ सामने आ रहे हैं. बहुआ में जांच के दौरान तीन ऐसे पशुपालक मिले हैं जो यह कह रहे हैं कि गाय उनके पास थी, लेकिन कुछ दिन पहले मर गई. उन्होंने गाय को छोड़ा नहीं है. लेकिन जब इन पशुपालकों से गाय मरने के बाद पोस्टमार्टम न कराए जाने का कारण पूछा गया तो कोई उत्तर नहीं दे सके. सहभागिता शर्त में शामिल है कि गाय अगर खूंटे में मर रही है तो बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार नहीं होगा. तीनों में मामलों में पोस्टमार्टम नहीं हुआ.गाय ली है तो उसे खूंटे पर होना चाहिए, अगर गाय मरी है तो उसका पोस्टमार्टम या खूंटा तोड़कर भागी है तो मुकदमा दर्ज होना चाहिए. अगर पशु पालक ने यह नहीं कराया है तो माना जाएगा कि वह सिर्फ लाभ लेने के लिए गाय को ले गया और फिर उसे छोड़ दिया।ऐसे पर मुकदमा भी होगा व अनुदान की राशि भी
वापस ले ली जाएगी.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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