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Fatehpur : फतेहपुर ज‍िले के बहुआ कस्बे का एक मात्र राजकीय कन्या सीनियर बेसिक स्कूल अपनी मुक्ति की राह देख रहा है. इस स्कूल की बदहाल स्थिति को देखकर यह नहीं लगता कि सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना की तरफ ध्यान दे रही है.


यूपी के फतेहपुर ज‍िले में सरकार की महत्‍वाकांक्षी योजना ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है. दरअसल ज‍िले में आजादी से पहले तीन राजकीय कन्या सीनियर बेसिक स्कूल बने थे. इनमें एक फतेहपुर नगर, दूसरा बहुआ कस्बा और तीसरा खजुहा में बना था. अब यह स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही के शिकार हो गए. इनमें से दो स्कूल बहुआ और खजुहा के बंद कर दिए गए हैं. वहीं एकमात्र फतेहपुर नगर का स्कूल ही चल रहा है. वहीं बहुआ और खजुहा इलाके की छात्राओं की श‍िक्षा पर ग्रहण लग गया है.

जानकारी के मुताब‍िक, राजकीय कन्या सीनियर बेसिक स्कूल का निर्माण 31 मई सन 1942 में अंग्रेजों ने कराया था. इनमें एक स्कूल बहुआ, दूसरा फतेहपुर नगर और तीसरा खजुहा में बनवाया गया था. बहुआ में बने इस स्कूल का उद्घाटन फतेहपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आरबीबीएन चक्रवर्ती (R.B.B.N. chakravarti) ने किया था. इस स्कूल को 1942 में पांचवीं कक्षा तक शुरू किया गया. और सन् 1964 में इसे जूनियर कर दिया गया था.

शासन प्रशासन की अनदेखी का शिकार हुआ स्कूल

कस्बे के निवासियों के अनुसार लगातार स्कूल प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी का शिकार होता रहा. ना तो शासन की ओर से स्कूल के लिए कोई आर्थिक मदद मिली और ना ही प्रशासन की तरफ से कोई ध्यान दिया गया.

2017 में विद्यालय से सभी अध्यापिकाएं हो गईं थीं कार्य मुक्त

राजकीय बालिका विद्यालय बहुआ में स्थाई रूप से नियुक्त अध्यापिकाएं 31 मार्च 2017 को ही कार्य मुक्त हो गई थीं. मुन्नी देवी (Munni devi) प्रधानाध्यापिका और सीता तिवारी (Seeta tiwari) सहायक अध्यापिका यहां की अंतिम स्थाई अध्याापिकाएं थीं. इसके बाद इसे बेसिक से संबद्ध करके स्कूल की कमान विष्णुचंद्र त्रिपाठी (Vishnu chandra tripathi) को सौंप दी गई. इनके साथ बेसिक के अतुल कुमार सिंह (Atul kumar singh) को सहायक अध्यापक के तौर पर रखा गया. 24 अगस्त 2020 को स्कूल में संबद्ध किए गए दोनों अध्यापकों को अपने अपने स्कूलों के लिए वापस भेज दिया गया. इसमें पढ़ने वाले करीब 80 बच्चों को दूसरे स्कूलों में संबद्ध कर दिया गया, और धीरे धीरे स्कूल का भवन गिर गया.

दिन ढलते ही परिसर में हो जाता है नशेड़ियों का जमावड़ा

स्कूल का भवन कुछ तो गिर गया है और कुछ जर्जर स्थिति में है. जो र्जजर स्थिति में है, वहां दिन ढलते ही नशेड़ियों का जमावड़ा होने लगता है. नशा करने के बाद कस्बे में आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया जाता है.

रुख सकारात्मक है तो पैसा आएगा
वर्तमान में बीजेपी (BJP) के विधायक विक्रम सिंह (Vikram singh) ने बताया कि सरकार के स्तर पर हमने प्रयास किया है, लेकिन अभी पैसा आया नहीं हैं, लेकिन मुझे लगता है रुख सकारात्मक है तो पैसा आएगा ही. स्कूल के बंद होने की जानकारी किसी ने नहीं दी. मैं जिलाधिकारी से बात करूँगा जो भी निर्णय होगा वही किया जाएगा.

कई सरकारें आईं और चली गईं, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

नगर पंचायत के सभासद अनुराग शुक्ला (Anurag shukla) ने बताया कि यह विद्यालय अति जर्जर अवस्था में है. कई बार शासन प्रशासन को इसके बारे में अवगत कराया गया. आजादी के पहले का यह विद्यालय है. कभी इस विद्यालय में छात्रों की संख्या सात से आठ सौ हुआ करती थी. पिछले साल से इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. स्कूल की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार शासन प्रशासन स्तर पर प्रयास किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।

शासन स्तर पर बंद करने का चल रहा है काम

एबीएसए(A.B.S.A.) ने बताया क‍ि हमें बीएसए सर (B.S.A. sir) ने बंद करवाने के लिए बोला है. उसकी आख्या मांगी गई है. वह हमने दे दी है. जिस विभाग से स्कूल है वहां से भर्ती ही नहीं हुई है तो कहां से चलाए जाएंगे. परिषदीय स्कूलों की संबद्धता भी समाप्त कर दी गई है.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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