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भारत कोयले की भारी कमी का सामना कर रहा है. इसके ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार केवल कुछ दिनों के ईंधन की आपूर्ति कर सकता है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा है कि स्थिति “टच एंड गो” है, और छह महीने तक “असहज” हो सकती है.

देश में सिर्फ चार दिनों के कोयले का स्टॉक बचा हुआ है. पिछले कुछ वक्त से कोयले की किल्लत ने सरकार को परेशान कर रखा है. कोयले की कमी की वजह से बिजली सेक्टर पर बड़ी आफत आ सकती है और देश को भारी ऊर्जा संकट से जूझना पड़ सकता है. बिजली मंत्री आर के सिंह (R.K. singh) ने दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि इस महीने के आखिर में देश के पावर स्टेशनों में सिर्फ चार दिन का स्टॉक बचा था. हाल के कुछ वर्षों में ऐसा कोयला संकट नहीं देखा गया था.

कोयले के उत्पादन में भारी कमी

देश में कोयले के उत्पादन में कमी से इसका स्टॉक लगभग खत्म होने के कगार पर है. लिहाजा बिजली का उत्पादन करने वाली आधे से अधिक प्लांट्स अलर्ट पर रखे गए हैं. बिजली मंत्री ने कहा कि उन्हें पता नहीं है कि अगले पांच-छह महीने उन्हें चैन मिलेगा कि नहीं क्योंकि कोयला संकट अभूतपूर्व है. आरके सिंह ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से हालात बेहद खराब हैं. देश में 40 से 50 गीगावाट बिजली का उत्पादन करने वाले थर्मल पावर प्लांट्स में सिर्फ तीन दिन के कोयले का स्टॉक बचा हुआ है.

मंत्रालय और कोल कंपनियों के अधिकारियों की बैठक

देश में कोयले से बिजली उत्पादन क्षमता 203 गीगावाट है. हमारी 70 फीसदी बिजली कोयले से पैदा होती है. अगले कुछ सालों में देश में बिजली की मांग काफी बढ़ने वाली है. कई केंद्रीय मंत्रालय इस वक्त कोल इंडिया और एनटीपीसी (NTPC) के साथ मिलकर कोयला खदानों का उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहे हैं. फिलहाल कोयला खनन कंपनियां उन्हीं कंपनियों को पहले कोयला देंगी, जिन्होंने बकाये का भुगतान कर दिया है.

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