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नई दिल्ली. दशहरा या विजयदशमी, वर्ष का वह समय है जब लोग अपने जीवन से बाधाओं को दूर करने के लिए देवी दुर्गा से प्रार्थना करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण भारतीय त्योहारों में से एक, यह पूरे देश में बहुत उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है. पिछले साल की तरह इस साल भी कोविड-19 महामारी के कारण कम धूमधाम से त्योहार मनाया जाएगा. सरकार ने लोगों से टीकाकरण के बाद ही पंडालों का दौरा करने का आग्रह किया है और आयोजकों से कहा है कि किसी भी पूजा स्थल पर बड़ी भीड़ इकट्ठा न हो.

दिनांक

त्योहार हिंदू कैलेंडर के अश्विन महीने में 10 दिनों के लिए मनाया जाता है, हालांकि उत्सव वास्तव में छठे दिन से शुरू होता है, जिसे महा षष्ठी भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा धरती पर आई थीं. अगले कुछ दिनों तक दशमी तक विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किए जाते हैं. इस साल दशहरा 15 अक्टूबर को पड़ रहा है.

पूजा का समय

विजय मुहूर्त 15 अक्टूबर को दोपहर 2:02 बजे से शुरू होकर दोपहर 2:48 बजे तक चलेगा. अपराह्न पूजा का मुहूर्त दोपहर 1:16 बजे से दोपहर 3:34 बजे तक है. दशमी तिथि 14 अक्टूबर को शाम 6:52 बजे से शुरू होकर 15 अक्टूबर को शाम 6:02 बजे समाप्त होगी.

महत्व

यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है क्योंकि देवी दुर्गा राक्षस महिषासुर का वध करती हैं. यही कारण है कि उन्हें महिषासुरमर्दिनी (महिषासुर का वध करने वाली) भी कहा जाता है. नवरात्रि (नौ रातों) का त्योहार महिषासुर और दुर्गा के बीच युद्ध की प्रशंसा करता है, जिसका समापन विजयदशमी के उत्सव में होता है. त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा “कन्या पूजन” है जब युवा लड़कियों को देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों के रूप में पूजा जाता है.

उत्सव

नवरात्रि की नौ रातों के दौरान, विजयादशमी से पहले, देश के कई हिस्सों में रामलीला का आयोजन किया जाता है. इस अवधि के दौरान, राम, सीता और लक्ष्मण की रामायण की एक संक्षिप्त कहानी और राक्षस राजा रावण के साथ उनकी लड़ाई खेली जाती है. दशहरे पर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के.

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