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Khaga : फतेहपुर के खागा कस्बे में वन विभाग की 16 बीघा बेशकीमती जमीन भूमाफियों ने बेच डाली है. जिन लोगों ने जमीनें खरीदीं, उन्होंने यहां अपने घर और मकान बना डाले. मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई.

उच्च न्यायालय ने तीन महीने के अंदर पूरी जमीन खाली कराने का आदेश दिया है. इस जमीन पर 250 से अधिक बने मकानों का कब्जा खाली कराना जिम्मेदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है. खागा कस्बे में बाईपास तिराहे, बाईपास चौराहे, नई बाजार और कुटि पर मुहल्ले शामिल हैं.

यहां तकरीबन 16 बीघा से अधिक भूभाग में बसे इन मुहल्लों में 250 से अधिक मकान बन चुके हैं. यह सारे मकान वन विभाग की जमीन पर बने है. कस्बे के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्लाटिंग कर जमीन बेचकर करोड़ों रुपये कमाए.

मामले में पवन कुमार (Pawan kumar) नाम के व्यक्ति ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंडल (Rajesh bindal) और न्यायाधीश पियूष अग्रवाल की बेंच में जनहित याचिका दाखिल की. प्रकरण संज्ञान में आया तो 23 जुलाई 2020 को तत्कालीन एसडीएम (SDM) ने जमीन की पैमाइश कराई.

इसमें 2.895 हेक्टेयर (16 बीघा से अधिक) जमीन वन विभाग की निकली. जिसके बाद इस रिपोर्ट से वन विभाग को भी अवगत कराया गया. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की दो सदस्यीय पीठ ने 2 दिसंबर को वन विभाग को तीन महीने के अंदर पूरी जमीन खाली कराने का आदेश दिया है.

जमीनी कब्जे के इस मामले में जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे (Apoorva dubey) ने कहा

प्रकरण मेरे कार्यकाल से पूर्व का है, इसलिए पूरी तरह से संज्ञान में नहीं है. माननीय उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने के बाद प्रकरण संज्ञान में आया है. पूरे प्रकरण की पत्रावली का गंभीरता से अध्ययन कर रिपोर्ट देने के लिए SDM को जिम्मेदारी दी गई है. शीघ्र ही उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगा.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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