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Fatehpur : फतेहपुर में सदर विधानसभा सीट जलभराव की गंभीर समस्या से ग्रसित है. यहां पर हर मौसम में सड़कों पर गंदा पानी जमा रहता है. दो दशक से शहर में सीवर लाइन निर्माण (Sewer line construction) की योजना सिर्फ कागजों में लिखी हुयी है. 3 लाख 55 हजार मतदाताओं वाली इस सीट के 2 लाख से अधिक मतदाता इस समस्या का सामना कर रहे हैं.

सीवर लाइन परियोजना पर वर्ष 2001 में उस समय के भाजपा विधायक (BJP MLA) राधेश्याम गुप्ता (Radheshyam Gupta) के कार्यकाल में काम शुरू हुआ था. परियोजना की लागत का 10 प्रतिशत निकाय और इतना ही राज्य सरकार को जमा करना था. 80 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार को देनी थी. निकाय ने अपने हिस्से का पैसा जमा नहीं किया, तो परियोजना खटाई में पड़ गई.

2012 में तत्कालीन विधायक सैय्यद कासिम हसन (Sayyed Kasim Hasan) ने परियोजना की पत्रावली निकलवाई और काम शुरू हुआ, लेकिन कुछ समय बाद इनका इंतकाल हो गया, तो पत्रावली फिर से दब गई और काम रुक गया.

2014 में लोकसभा के साथ सदर विधानसभा में उपचुनाव हुआ और भाजपा के विक्रम सिंह (Vikram Singh) विधायक बने. इसके बाद एक बार फिर सीवर लाइन की पत्रावली खोजी गई. आपको बता दें कि, तीन साल का पूरा समय सीवर प्लाट लगाने के लिए जमीन खोजने में ही लग गया. इसके बाद 2019 में जलनिगम ने डीपीआर (DPR) बनाया. डीएम (DM) के अनुमोदन के बाद पत्रावली राज्य सरकार को भेजी गई, लेकिन तब से वहीं पत्रावली अटकी पड़ी है.

सीवर लाइन न पड़ने से शहर में गंदगी के साथ जलभराव की समस्या विकराल रूप ले रही है, जो स्वच्छ भारत के सपने को मिट्टी में मिला रही है. इस समस्या को दूर करने के लिए अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने ठोस प्रयास नहीं किया है.

इसके साथ ही खास बात तो यह है कि यह समस्या हर चुनाव में मुद्दा बनती है और चुनाव के बाद गुम हो जाती है.

पत्थरकटा निवासी संजय सिंह (Sanjay Singh) का कहना है कि शहर के मध्य स्थित तालाबों में प्लाटिंग होने से जल निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं. ऐसे में दिन प्रतिदिन जलभराव की गंभीर समस्या बनती जा रही है. समस्या के निराकरण को लेकर जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हैं.

आवास विकास कालोनी निवासी रितिक सिंह (Ritik Singh) का कहना है कि सदर सीट के 60 प्रतिशत मतदाता शहर में रहते हैं. इसके बावजूद क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि शहर की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं जबकि शहर के मतदाता ही हार-जीत तय करते हैं.

सिविल लाइन निवासी मनीष श्रीवास्तव (Maneesh Shrivastava) का कहना है कि शहरवासी गंदगी और जलभराव की समस्या से परेशान हैं. शहरी मतदाताओं की समस्या जनप्रतिनिधियों को दिखाई नहीं पड़ रही. स्थिति ये है कि शहर में छह साल से निर्माणाधीन नाले तक अधूरे पड़े हैं.

पत्थरकटा निवासी अरविंद (Arvind) का कहना है कि जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण आबादी के नाले और नालियां बज बजाती रहती हैं. वाटर लाइन लीकेज होने से यही गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है जिसके कारण दूषित पानी पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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