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New Delhi : फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत कई अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है. दिल्ली में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति की अहम बैठक के बाद प्रेस क्लब (Press Club) में पत्रकार वार्ता के दौरान किसान नेता डा. दर्शन पाल (Dr. Darshan Pal) ने मांगों को लेकर आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया है. इसके तहत छोटी-छोटी बैठकें भी की जाएंगी और सरकार की गलत नीतियों के बारे में भी बताया जाएगा. केंद्र सरकार ने जो वादे पूरे नहीं किए उसके बारे में जनता के बीच प्रचार किया जाएगा. इसके साथ ही लखीमपुर खीरी मामले को भी उठाया जाएगा. जिसमे अभी तक आरोपित केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बने हुए हैं, जबकि उन्हें बर्खास्त करने की मांग किसान संगठनों की ओर से उठी थी.

संयुक्त किसान मोर्चा की पत्रकार वार्ता के दौरान किसान नेता शिव कुमार कक्का (Shiv Kumar Kakka) ने कहा कि 5 बिंदु पर सहमति बनी थी और उसी आधार पर हमने आंदोलन को स्थगित किया था. किसान नेता ने कहा कि MSP पर कानून को लेकर समिति बनाने, किसानों पर मुकदमें को वापस लेने, पराली पर जुर्माने के प्रविधान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. केंद्र सरकार द्वारा वादाखिलाफी, इसलिए 31 जनवरी को विश्वासघात दिवस मनाया गया था.

इसके तहत ही 31 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में विश्वासघात दिवस मनाया गया था. इसका उद्देश्य केंद्र व राज्य सरकार को सशक्त संदेश देना था. इसके तहत कुछ जगहों पर तहसील स्तर पर भी प्रदर्शन किया गया था. संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार केंद्र सरकार की 9 दिसंबर को दी गई जिस चिट्ठी के आधार पर किसानों ने अपना आंदोलन स्थगित किया था, उसके लिखित आश्वासन को पूरा न करने के विरोध में किसानों ने 31 जनवरी को देशभर में विश्वासघात दिवस मनाया था.

ये हैं किसान संगठनों की अहम मांगें

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार सहमत हो.
  • प्रदर्शनकारी हजारों किसानों और उनके नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस हों.
  • लखीपुरखीरी कांड के पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों पर कार्रवाई हो.
  • वायु प्रदूषण को लेकर मुद्दा, जो किसानों के पराली जलाने से जुड़ा है.

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद करने के ऐलान के बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया था. साथ ही यह भी कहा था कि सरकार ने हमारी अन्य मांंगें नहीं मानीं तो दोबारा आंदोलन शुरू हो सकता है.

लेख – टीम वाच इंडिया नाउ

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