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इंदिरा गांधी के बाद देश की दूसरी महिला वित्त मंत्री बनाने वाली भारत के वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) आज अपना 61वां जन्मदिन (Birthday) मना रही हैं. देश की पहली महिला है जो पूर्ण रूप से वित्त मंत्री बनने वाली और साथ ही साथ मोदी सरकार-1 में भारत के रक्षा मंत्री रहने का सौभाग्य हासिल करने वाली श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अपने दम पर यह मुकाम हासिल किया है और इसके पीछे की मेहनत और उनकी लगन का सम्मान किया जाना चाहिए. आज इस मौके पर उन्हें देश विदेश से बधाई के संदेश आ रहे हैं और खुद प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भी निर्मला सीतारमण को ट्विटर पर जन्म दिवस की बधाई दी है. यह निर्मला सीतारमण के बारे में कुछ जानकारियां और बाते जानने की कोशिश करते हैं.

निर्मला सीतारमण का बचपन
आपको जानकर आश्चर्य होगा की वर्तमान में भारत के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने करियर की शुरुआत एक मामूली सेल्स गर्ल के तौर पर की थी. उनका जन्म तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में एक मध्यम वर्गीय परिवार में 18 अगस्त 1959 को हुआ था. पिता नारायण सीतारमण रेलवे में काम करते थे जबकि उनकी माता का नाम था सावित्री सीतारमण और वे एक हाउस वाइफ थीं. अपनी शुरुआती पढ़ाई चेन्नई और तिरुचिरापल्ली मैं पूरी करने वाली निर्मला सीतारमण ने 1980 में तिरुचिरापल्ली के सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बैचलर की डिग्री हासिल की है. अपनी बैचलर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद निर्मला सीतारमण दिल्ली आ गईं और उन्होंने ने 1984  में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से इकॉनॉमिक्स में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की.

लंदन यूनिवर्सिटी से पीएचडी
जेएनयू से अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी करने के बाद में सीतारमण ने पराकला प्रभाकर से शादी कर ली और शादी कर लंदन चली गईं. पराकला प्रभाकर से सेवन की मुलाकात जेएनयू में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के दौरान हुई थी. आपको बता दें कि प्रभाकर के परिवार में कई लोग कांग्रेस से जुड़े हुए थे यानी कांग्रेसी नेता थे और खुद प्रभाकर ने भी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चंद्रबाबू नायडू के लिए कम्युनिकेशन एडवाइजर के तौर पर काम किया था. 
लंदन में उन्होंने प्राइस वाटरहाउस में रिसर्च एंड एनालिसिस में सीनियर मैनेजर के तौर पर काम किया. इतना ही नहीं लंदन में बीबीसी वर्ल्ड के साथ भी उन्होंने कुछ समय के लिए काम किया. हालांकि पीडबलूसी में नौकरी करने से पहले उन्होंने कुछ दिन तक लंदन के रीजेंट स्ट्रीट में एक होम डेकोर स्टोर में सेल्स गर्ल का भी काम किया था. वर्ष 1991 में निर्मला सीतारमण भारत वापस लौट आई और इसके बाद उन्होंने हैदराबाद में रहने का फैसला किया. हैदराबाद में उन्होंने कुछ समय तक पब्लिक पॉलिसी में डिप्टी डायरेक्टर पद को भी संभाला.

राजनीति में पहला कदम
अपने पति प्रभाकर और उनके परिवार के कांग्रेसी विचारधारा के होने के बावजूद भी निर्मला सीतारमण में कांग्रेस की बधाई बीजेपी में शामिल होना बेहतर समझा. 2006 में निर्मला सीतारमण भाजपा में शामिल हुईं. भाजपा में ज्वाइन होने के कुछ समय बाद ही उन्हें एक राजनीतिक करियर का ग्राफ काफी तेजी से ऊपर चढ़ा मन बहुत कम समय में उन्होंने भाजपा में अपनी जगह बना ली. हिंदी भाषा में कमजोर होने के बावजूद भी निर्मला सीतारमण भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अच्छा खासा तालमेल बना पाने में सक्षम रहीं. उसके बाद धीरे-धीरे कर कर निर्मला सीतारमण भाजपा में नई उचाईयों पर पहुंचती गईं. वर्ष 2010 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने निर्मला सीतारमण की स्पष्ट और सटीक बात करने की प्रवृत्ति और उनके स्नेहा पूर्ण ढंग से बात बताने या सवालों के जवाब देने के तरीके को ध्यान में रखते हुए उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया. उसके बाद निर्मला सीतारमण को भाजपा में एक नई पहचान मिली साथ ही साथ विपक्ष ने भी निर्मला सीतारमण और उनकी बातों को जान व समझ पाया. प्रवक्ता के रूप में निर्मला सीतारमण ने ना केवल भाजपा के बड़े नेताओं बल्कि विपक्ष के भी कई नेताओं का ध्यान आकर्षित किया और उन्होंने अपने काम के लिए काफी वाहवाही भी बटोरी. खुद वर्तमान के प्रधानमंत्री और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने भी उनकी बातों को खूब सराहा साथ ही उनको भरपूर समर्थन दिया. जल्द ही भाजपा ने आंध्रप्रदेश राज्य से उन्हें राज्यसभा का सदस्य भी नियुक्त करवा दिया और आदेश के बाद भाजपा में उनकी पहचान कुछ प्रमुख चेहरों में से एक में होने लगी और उनका कद लगातार बढ़ता चला गया. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सीतारमण ने चुनाव में भाजपा को जीत दिलाने के लिए बहुत अहम भूमिका अदा की. लोकसभा चुनाव में उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए ही उन्हें मोदी सरकार के कैबिनेट में जगह मिली और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्राप्त हुआ.

मोदी सरकार में निर्मला सीतारमण का कार्यकाल

भाजपा में रहते हुए निर्मला सीतारमण राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रहीं. लेकिन सीतारमण के करियर में सबसे अहम और सबसे बड़ा रोल 2017 में उनके सामने आया. वर्ष 2017 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पारिकर के इस्तीफे के बाद कैबिनेट से नए गांव कम अनुभव वाले चेहरे को रक्षा मंत्री के पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया. इसमें निर्मला सीतारमण ने अन्य कैबिनेट मंत्रियों को पीछे छोड़कर यह पद हासिल किया और वह देश की पहली महिला बने जिन्होंने फुल टाइम रक्षा मंत्री का पद संभाला. आपको बता दें कि इंदिरा गांधी ने इससे पूर्व रक्षा मंत्री पद रिक्त प्रभार लिया था. इसके बाद वर्ष 2019 में भाजपा को बड़ी जीत मिलने के बाद और स्वर्गीय अरुण जेटली वित्त मंत्री बनने से इनकार करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने निर्मला सीतारमण के कैरियर को देखते हुए उन्हें वित्त मंत्री बनने का अवसर दिया. भारत की पहली फुलटाइम वित्त मंत्री बनने वाली भी पहली महिला निर्मला सीतारमण ही है. सीतारमण से पहले इंदिरा गांधी 1970-71 में वित्त मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला था. गौरतलब है कि इससे पहले निर्मला सीतारमण वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री भी रह चुकी हैं और उन्होंने राज्य मंत्री के तौर पर वित्त और कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय में भी काम किया है.

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